Thursday, November 6, 2014

कौशल कैसा प्रेम में?

अभिनय कौशल प्रेम का, लेकिन मन में खोट।
परदा जब सच का हटे, सुमन हृदय में चोट।।

जीवन चलता प्रेम से, सदा सुमन रख ध्यान।
प्रेम बहुत अनमोल है, नहीं करो अपमान।।

उतर सके जो आँख से, हो दिल में अहसास।
ऐसे प्रेमी पर सुमन, कर सकते विश्वास।।

इक दूजे की आँख से, जाने कुशल व छेम।
कौशल कैसा प्रेम में, सुमन कुशल हो प्रेम।।

खोना पाना कुछ नहीं, प्रेम नहीं व्यापार।
त्याग-समर्पण ही सुमन, प्रेम-जगत आधार।।

Wednesday, November 5, 2014

छूरी बिना कसाई है

रिश्ते में वह भाई है
छूरी बिना कसाई है

घर मेरे आलम गम का
उनके घर शहनाई है

कहते मेरी खुशियों को
सौतन बनकर आई है

समझ न पाया हूँ अबतक
क्यों मुझसे रानाई है

कहते मेरी बातों पर
सुमन बड़ा सौदाई है 

Wednesday, October 29, 2014

ललक रखो तुम आँखों में

जीवन चलता भले धरा पर फलक रखो तुम आँखों में
गम के दिन में भी खुशियों की झलक रखो तुम आँखों में
नहीं सुमन कहलाता जीवन केवल साँसों का चलना
हाल बुरा फिर भी जीने की ललक रखो तुम आँखों में

चकाचौंध बाहर है जितना मन में उतना अंधकार है 
दिवाली त्योहार तो है पर सुमन ज्ञान का इक विचार है
हाथ मिलाकर जीना सीखो दीप से दीप जलाओ
दीप जले सबके देहरी यह भारत का इक संस्कार है 

अपने ढंग से बोल रहे सब सुनने को तैयार नहीं
अगर सुने तो यारी अपनी ना सुनने पर यार नहीं
धन-पद से प्रायः तय होता ज्यादा काबिल कौन यहाँ
होड़ मची काबिल बनने की चमन सुमन से प्यार नहीं

तुमसे मिलने की चाहत थी मिलकर तुमसे आस जगी
वो कोमल अनुभूति कहूँ क्या दिल में बिल्कुल खास जगी
कई बार ऐसा क्यों होता मिल के भी मिलना मुश्किल
हुआ सुमन के सँग यही जब फिर मिलने की प्यास जगी

महलों में दुनिया के मालिक क्या चिन्ता संतान की
इस दुनिया को नहीं जरूरत और अधिक धनवान की
मानवता ही नहीं बची तो खाक बचेगी ये दुनिया
कदम कदम पर सुमन जरूरत नित बेहतर इन्सान की

Tuesday, October 21, 2014

रंग तुम्हारा होगा

वैसे दिन की आस लगी जब संग तुम्हारा होगा
जीवन तो मेरा होगा पर रंग तुम्हारा होगा
हुईं हैं बातें नजरों से पर होठों पर हैं ताले क्यों
आस सुमन को मौन एकदिन भंग तु्म्हारा होगा

जीवन इक संघर्ष हमारा, कर्तव्यों में खो जाएं
पूरा काम लगन से करके, चलो रात में सो जाएं
आसानी से राह कटे गर सँग सुमन के प्रियतम हो
जीने खातिर कल को फिर से, इक दूजे के हो जाएं

शादी के पहले प्रेमी - जन, इक दूजे पे मरते हैं
मगर बाद में सच पूछो तो इक दूजे से डरते हैं
नाप-तौल से दूर बहुत है सुमन प्रेम की ये दुनिया
देख परिन्दे भी सिद्दत से प्यार किया करते हैं

कभी भलाई के बदले की ख्वाहिश मत करना
भले जख्म अपना दे कोई रंजिश मत करना
दुनिया सिर्फ मुहब्बत से है और मुहब्बत दुनिया
मिलेंगे काँटे मगर सुमन से साजिश मत करना

Friday, October 10, 2014

संकट में विश्वास

छोटी मोटी बात को, अगर नहीं दें तूल।
काँटे खुद हट जायेंगे, मिले राह में फूल।।

दुनिया है सहयोग से, सबसे सबको आस।
बात दुखद है ये सुमन, संकट में विश्वास।।

रिश्ते प्यारे तबतलक, ठीक रहे सम्बन्ध।
कोशिश कर टूटे नहीं, रिश्तों के अनुबन्ध।।

रिश्ते बनते इसलिए, जीना हो आसान।
देख सुमन नित हो रहा, रिश्तों का अपमान।।

रिश्ते में अपने सुमन, अक्सर खेले दाव।
रिसते रिसते बन रहे, रिश्तों में भी घाव।।
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