चेहरा क्यूँ दिखता कमजोर।
देखो फिर से नभ की ओर।।
तारे जहाँ सदा हँसते हैं,
और चमकता चंदा।
जी सकते तो जी लो ऐसे,
छूटेगा हर फंदा।
आग उगलता सूरज फिर भी,
नित ले आता भोर।।
देखो फिर से नभ की ओर।।
नदियों की खुशियाँ तो देखो,
गीत हमेशा गाती है।
हर विरोध के पत्थर को भी,
सँग बहा ले जाती है।
तब उसकी मस्ती बढ़ती जब,
घटा घिरे घनघोर
देखो फिर से नभ की ओर।।
भले तोड़ ले कोई सुमन को,
फिर भी वह तो हँसता है।
और सुगंध भी कैद नहीं है,
हवा के सँग सँग बहता है।
चिड़ियों की कलरव में धुन है,
मत कहना तू शोर।।
देखो फिर से नभ की ओर।।
वर्षों हमने की है मुहब्बत, नूर अभी तक आँखों में
फिर कैसी है आज अदावत, नूर अभी तक आँखों में
कभी दूर ना हम दोनों थे, इक दूजे की बाँहों से
शेष अभीतक वैसी चाहत, नूर अभी तक आँखों में
जीवन में दोनों पहिये का, मान बराबर हो जाए
तब शायद ही कोई शिकायत, नूर अभी तक आँखों में
घर में हों या फिर महफिल में, आँखों से बतियाते हम
समझे इक दूजे की नीयत, नूर अभी तक आँखों में
ऐसी अनुपम जोड़ी के पथ, सदियों तक हो सदा सुमन
हर साँसों में ख़ास इनायत, नूर अभी तक आँखों में
आँगन सूना घर हुआ, बच्चे घर से दूर।
मजदूरी करने गया, छोड़ यहाँ मजबूर।।
जल्दी से जल्दी बनें, कैसे हम धनवान।
हम कुदाल बनते गए, दूर हुई संतान।।
ऊँचे पद संतान की, कहने भर में जोश।
मगर वही एकांत में, भाव-जगत बेहोश।।
कहाँ मिला कुछ आसरा, वृद्ध हुए माँ बाप।
कहीं सँग ले जाय तो, मातु पिता अभिशाप।।
जैसी भी है जिन्दगी, करो सुमन स्वीकार।
शायद जीवन को मिले एक नया विस्तार।।
जिसने दुःख में जीना सीखा
जड़ना वही नगीना सीखा
फटेहाल जीवन की गाथा
चिथड़ों को भी सीना सीखा
जीवन को भवसागर कहते
कैसे चले सफीना सीखा
जीवित रहना कम साधन में
सालों साल महीना सीखा
कितने कम हैं खुशियों के पल
जहर ग़मों का पीना सीखा
बिना परिश्रम भोग, रोग है
निकले सदा पसीना सीखा
चाल अघोषित है जीवन की
नूतन सुमन करीना सीखा
लेखन में प्रतिबंध मुझे स्वीकार नहीं
प्रायोजित रचना से कोई प्यार नहीं
बच के रहना साहित्यिक दुकानों से
जी कर लिखता हूँ कोई बीमार नहीं
मठाधीश की आज यहाँ बन आई है
कितने डर से करते हैं तकरार नहीं
धन प्रभाव के बल पर उनकी धूम मची
कितने जिनको साहित्यक आधार नहीं
रचना में ना दम आती विज्ञापन से
ऐसे जो हैं लिखने का अधिकार नहीं
उठे कलम जब दिल में मस्ती आ जाए
खुशबू रचना में होगी इनकार नहीं
खुशबू होगी तो मधुकर भी आयेंगे
सेवा है साहित्य सुमन व्यापार नहीं
हाल की कुछ रचनाओं को नीचे बॉक्स के लिंक को क्लिक कर पढ़ सकते हैं -