आपस में अपनापन है
फिर भी छोटा आँगन है
मुख पर खुशियों का विज्ञापन
पर आँखों में सावन है
खुशियों के पल और शबनम का
कितना त्वरित समापन है
माँगों में सिन्दूर भरे हैं
दिखती क्यों वैरागन है
सुमन चतुर इस युग के रावण
सचमुच राम खेलावन है
फिर से करने तुम राज, रामजी कब आओगे?
है पूजित रावण आज, रामजी कब आओगे?
निज कर्मों से सिखलाया, नारी का मान बढ़ाया
लुटती सीता की लाज, रामजी कब आओगे?
हक धोबी को भी बोले, निज मन की गाँठें खोले
अब घुटती है आवाज, रामजी कब आओगे?
भाई का कातिल भाई, रोती कौशल्या माई
है बिखरा हुआ समाज, रामजी कब आओगे?
मन्दोदरी ने समझाया, रावण उसको धमकाया
अब घर घर यही रिवाज, रामजी कब आओगे?
तेरे भरत, लखन जी भ्राता, पर तू सबको अपनाता
संकट में जगत-जहाज, रामजी कब आओगे?
सेवक जब मारुतिनन्दन, नित करे विभीषण वन्दन
फिर से लो सुमन का ताज, रामजी कब आओगे?
दिल में अरमान जल रहे कितने
नए सपने भी पल रहे कितने
देख गिरगिट ने खुदकुशी कर ली
रंग इन्सां बदल रहे कितने
यूँ तो अपनों के बीच रहते हम
फिर भी आँसू निकल रहे कितने
चाँद पाने की दिल में ख्वाहिश ले
चाँद जैसे बदल रहे कितने
हजारों दोस्त मिलेंगे सिर्फ कहने को
दुख के दिन में असल रहे कितने
मौत परिचय बताती जीवन का
कोई जी कर सफल रहे कितने
इस हकीकत से रू-ब-रू है सुमन
हाल बदले, ऊबल रहे कितने
भक्तों को बनाते हैं वो नादान देखिये
अब छोड़िये भगवान को इन्सान देखिये
सुन्दर से लिखा द्वार पे सेवा ही धरम है
मिलते ही उनके दिल का शैतान देखिये
कुदरत से मिली नेमतों की फिक्र है किसे
भगवान के वरदान का अपमान देखिये
चिड़ियाँ चहक रहीं थीं और खो गया था मैं
कलरव में छिपे गीत का उनवान देखिये
खुद से भी लड़ रहे हैं दुनिया से अनवरत
होते नहीं सुमन कभी हलकान देखिये
मौत आती है आने दे डर है किसे, मेरे जीने की रफ्तार कम तो नहीं
बाँटते ही रहो प्यार घटता नहीं, माप लेना तू सौ बार कम तो नहीं
गम छुपाने की तरकीब का है चलन, लोग चिलमन बनाते हैं मुस्कान की
पार गम के उतर वक्त से जूझकर, अपनी हिम्मत पे अधिकार कम तो नहीं
था कहाँ कल भी वश में ना कल आएगा, हर किसी के लिए आज अनमोल है
कई रोते मिले आज, कल के लिए, उनके चिन्तन का आधार कम तो नहीं
लोग धरती पे आते हैं रिश्तों के सँग, और बनाते हैं रिश्ते कई उम्र भर
टूट जाते कई उनमे क्यों सोचना, कहीं आपस का व्यापार कम तो नहीं
जिन्दगी होश में है तो सब कुछ सही, बोझ माना तो हर पल रुलाती हमे
ये समझकर अगर तू न समझा सुमन, तेरी खुशियों का संसार कम तो नहीं।
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